इस गाइड में
पटना में पुराने सचिवालय के सामने शहीद स्मारक (Martyrs' Memorial) खड़ा है — सात युवकों की काँसे की प्रतिमा, जिनमें से एक राष्ट्रीय ध्वज ऊँचा उठाए हुए है। यह स्मारक उन छात्रों की याद में है, जो 11 अगस्त 1942 को तिरंगा फहराने सचिवालय की ओर बढ़े और पुलिस की गोली से मारे गए। उनके बलिदान ने पूरे भारत में भारत छोड़ो आंदोलन (Quit India Movement) के सबसे तीव्र दौरों में से एक को जन्म दिया।
आह्वान
- 8 अगस्त 1942 को बंबई में अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ, और गांधीजी ने "करो या मरो" (Do or Die) का नारा दिया।
- 9 अगस्त की सुबह पूरे भारत में नेताओं को गिरफ़्तार कर लिया गया, जिनमें राजेंद्र प्रसाद और बिहार के अन्य नेता भी थे।
- नेताओं के जेल में होने पर आंदोलन छात्रों, किसानों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के हाथ में चला गया।
पटना सचिवालय के शहीद
- 11 अगस्त 1942 को छात्रों का एक जुलूस राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए पटना के सचिवालय की ओर बढ़ा।
- ज़िलाधिकारी के आदेश पर पुलिस ने गोली चला दी।
- ध्वज को एक के बाद एक आगे ले जाने की कोशिश में सात छात्र मारे गए।
सात शहीद:
- उमाकांत प्रसाद सिन्हा
- रामानंद सिंह
- सतीश प्रसाद झा
- जगतपति कुमार
- देवीपद चौधरी
- राजेंद्र सिंह
- रामगोविंद सिंह
विद्रोह का फैलाव
इसके बाद के दिनों और हफ़्तों में आंदोलन असाधारण तीव्रता के साथ पूरे बिहार में फैल गया।
| रूप | उदाहरण |
|---|---|
| संचार साधनों पर हमले | रेल पटरियाँ उखाड़ी गईं, स्टेशन जलाए गए, तार काटे गए — खासकर उत्तर बिहार में और मुख्य रेल लाइनों के किनारे |
| सरकारी भवनों पर कब्ज़ा | थानों, डाकघरों और कचहरियों पर हमला हुआ या कब्ज़ा किया गया |
| समानांतर प्रशासन | कुछ इलाकों में स्थानीय समितियों ने थोड़े समय के लिए प्रशासन सँभाल लिया |
| छात्रों की भागीदारी | स्कूल-कॉलेज खाली हो गए; छात्रों ने जुलूसों का नेतृत्व किया |
| किसानों की भागीदारी | सारण, मुज़फ़्फ़रपुर, दरभंगा, मुंगेर, भागलपुर, पटना और शाहाबाद जैसे ज़िलों के गाँव |
कुछ हफ़्तों तक बिहार के बड़े हिस्सों पर ब्रिटिश नियंत्रण टूट गया।
दमन
अंग्रेज़ों की प्रतिक्रिया बहुत कठोर थी:
- सेना की तैनाती, जिसमें हवाई गश्त भी शामिल थी;
- कई जगह भीड़ पर गोलीबारी;
- गाँवों पर सामूहिक जुर्माना;
- बड़े पैमाने पर गिरफ़्तारियाँ और कोड़े लगाना;
- घरों को जलाना।
इस आंदोलन के दौरान सबसे अधिक दमन और हताहतों वाले प्रांतों में बिहार भी था।
जयप्रकाश नारायण का जेल से निकल भागना
- समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण (JP) हजारीबाग सेंट्रल जेल में बंद थे।
- नवंबर 1942 में दीवाली की रात JP और उनके कई साथी — जिनमें योगेंद्र शुक्ल, सूरज नारायण सिंह, गुलाब चंद गुप्ता, रामनंदन मिश्र और शालिग्राम सिंह शामिल थे — जेल की दीवार फाँदकर निकल भागे।
- JP भूमिगत हो गए और प्रतिरोध संगठित किया, जिसमें नेपाल सीमा क्षेत्र से किया गया काम भी शामिल था। वहीं उन्होंने आज़ाद दस्ता (एक छापामार दल) बनाया। बाद में उन्हें फिर गिरफ़्तार कर लिया गया।
आंदोलन में महिलाएँ
महिलाओं ने जुलूसों, धरनों और भूमिगत कामों में हिस्सा लिया, और उनमें से कई गिरफ़्तार हुईं। छात्रों की तरह उनकी भागीदारी ने भी आंदोलन के जन-चरित्र को रेखांकित किया।
महत्व
| स्तर | महत्व |
|---|---|
| राष्ट्रीय | ब्रिटिश-विरोधी भावना की गहराई दिखाई, और यह भी कि अंग्रेज़ी राज भारत पर अपने नियंत्रण के भरोसे नहीं रह सकता था |
| बिहार | देश में भारत छोड़ो आंदोलन के सबसे व्यापक और उग्र विद्रोहों में से एक |
| नेतृत्व | JP जैसे समाजवादी नेताओं को प्रमुखता मिली |
| स्मृति | शहीद स्मारक आज भी बिहार के बलिदान का प्रतीक है |
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- पटना सचिवालय गोलीकांड कब हुआ?
- कितने छात्र मारे गए?
- जयप्रकाश नारायण 1942 में किस जेल से निकल भागे थे?
- आज़ाद दस्ता क्या था?
- शहीद स्मारक कहाँ है?
मुख्य परीक्षा शैली:
- "बिहार में भारत छोड़ो आंदोलन एक जन-विद्रोह था।" विवेचना कीजिए।
- बिहार के संदर्भ में भारत छोड़ो आंदोलन में छात्रों और युवाओं की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Bihar Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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