इस गाइड में
1850 के दशक में लखनऊ की किसी गर्मियों की शाम, नवाब वाजिद अली शाह शायद कथक का प्रदर्शन देखते — या उसमें स्वयं नाचते — या कोई ठुमरी रचते मिल जाते। लगभग तीन सौ किलोमीटर दूर, वाराणसी के मंदिरों और घाटों पर गायक और तबला वादक उन परंपराओं को निखार रहे थे जो अगली एक सदी तक भारतीय शास्त्रीय संगीत को दिशा देने वाली थीं। उत्तर प्रदेश भारतीय संगीत और नृत्य के महान केंद्रों में से एक रहा है।
कथक
- भारत के शास्त्रीय नृत्य रूपों में से एक, जिसे संगीत नाटक अकादमी मान्यता देती है।
- इसका नाम कथा शब्द से आया है; इसकी शुरुआत कथाकारों से हुई — मंदिरों के वे कथावाचक जो गीत, मूक अभिनय और नृत्य के माध्यम से महाकाव्यों की कथाएँ सुनाते थे।
- मुगल और अवध के संरक्षण में यह एक परिष्कृत दरबारी कला के रूप में विकसित हुआ।
विशेषताएँ
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| पद-संचालन (तत्कार) | घुँघरुओं के साथ जटिल लयबद्ध पैटर्न |
| चक्कर | तेज़ घुमाव |
| अभिनय | भावपूर्ण कथा-कथन |
| नृत्त और नृत्य | शुद्ध नृत्य और भावाभिव्यक्ति वाला नृत्य |
| संगीत | तबला और पखावज; सारंगी; गायन की संगत |
घराने
| घराना | विशेषताएँ | प्रमुख कलाकार |
|---|---|---|
| लखनऊ | लालित्य, कोमलता, भावपूर्ण अभिनय — अवध के दरबार में विकसित | कालका–बिंदादीन परिवार; शंभू महाराज; बिरजू महाराज |
| जयपुर | ज़ोरदार पद-संचालन और लय की जटिलता | — |
| बनारस | जानकीप्रसाद से जुड़ा; संतुलित शैली | — |
ठुमरी, दादरा और ग़ज़ल
- ठुमरी — एक उप-शास्त्रीय (light-classical) गायन शैली, जिसके केंद्र में श्रृंगार और भक्ति के विषय (प्रायः राधा–कृष्ण) होते हैं और जिसमें भावपूर्ण अलंकरण होता है।
- यह लखनऊ में वाजिद अली शाह के समय फली-फूली, जो अख़्तर पिया नाम से ठुमरियाँ रचते थे; और वाराणसी में भी (पूरब अंग)।
- दादरा, कजरी, चैती और होरी इससे जुड़ी उप-शास्त्रीय विधाएँ हैं।
- लखनऊ की उर्दू संस्कृति में ग़ज़ल की परंपरा खूब पनपी; बेगम अख़्तर (फ़ैज़ाबाद में जन्म) इसकी सबसे प्रसिद्ध आवाज़ हैं।
बनारस घराना
| क्षेत्र | कलाकार |
|---|---|
| गायन (ठुमरी, दादरा, ख़याल) | गिरिजा देवी ("ठुमरी की रानी"), सिद्धेश्वरी देवी, पंडित छन्नूलाल मिश्र, राजन और साजन मिश्र |
| तबला | बनारस तबला घराना — पंडित किशन महाराज, पंडित सामता प्रसाद |
| शहनाई | उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ाँ (जन्म डुमराँव, बिहार में; वाराणसी में रहे और वहीं प्रस्तुति दी; भारत रत्न 2001) |
| सितार | पंडित रविशंकर का जन्म वाराणसी में हुआ था |
उत्तर प्रदेश के तबला घराने
| घराना | टिप्पणी |
|---|---|
| लखनऊ | कथक की संगत के लिए उपयुक्त |
| फ़र्रुख़ाबाद | लखनऊ घराने से विकसित |
| बनारस | दमदार, गूँजती शैली |
| अजराड़ा | मेरठ के पास के एक गाँव के नाम पर; दिल्ली घराने की शाखा |
छह प्रमुख तबला घरानों में से चार उत्तर प्रदेश से जुड़े हैं।
ध्रुपद
- ध्रुपद, हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की सबसे पुरानी जीवित शैली, की जड़ें इस क्षेत्र में गहरी हैं — यह अकबर के दरबार (आगरा) में तानसेन और मंदिर परंपराओं से जुड़ी है।
- वृंदावन और वाराणसी में ध्रुपद की लंबी परंपरा है; वाराणसी के तुलसी घाट पर ध्रुपद मेला लगता है।
उत्तर प्रदेश का लोक संगीत
| विधा | क्षेत्र / अवसर |
|---|---|
| कजरी | वर्षा ऋतु (सावन) में गाई जाती है, विशेषकर मिर्ज़ापुर और वाराणसी में |
| चैती | चैत्र मास में गाई जाती है |
| बिरहा | पूर्वी उत्तर प्रदेश के अहीर समुदाय के लोकगीत |
| आल्हा | महोबा (बुंदेलखंड) के योद्धाओं आल्हा और ऊदल की वीर गाथाएँ |
| रसिया | ब्रज के गीत, विशेषकर होली के आसपास |
| सोहर | संतान के जन्म पर गाया जाता है |
| नौटंकी | संगीत-प्रधान लोकनाट्य, विशेषकर कानपुर और हाथरस शैलियों से जुड़ा |
लोक नृत्य
| नृत्य | क्षेत्र |
|---|---|
| चरकुला | ब्रज — महिलाएँ सिर पर दीयों का ऊँचा, कई मंज़िलों वाला ढाँचा संतुलित करते हुए नाचती हैं |
| रासलीला | ब्रज — कृष्ण और गोपियों की नृत्य-नाटिका |
| धेढ़िया | पूर्वी उत्तर प्रदेश |
| करमा और झूमर | सोनभद्र और मिर्ज़ापुर के जनजातीय क्षेत्र |
संस्थाएँ
- भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ (संगीत और नृत्य की शिक्षा)।
- उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी।
- BHU का मंच कला संकाय (Faculty of Performing Arts)।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) शैली:
- कथक का कौन-सा घराना लालित्य और अभिनय के लिए जाना जाता है?
- वाजिद अली शाह किस नाम से ठुमरियाँ रचते थे?
- "ठुमरी की रानी" किसे कहा जाता है?
- चरकुला क्या है?
- किन गाथाओं में आल्हा और ऊदल की वीरता का वर्णन है?
मुख्य परीक्षा (Mains) शैली:
- "अवध के दरबारों और वाराणसी के घाटों ने हिंदुस्तानी संगीत को आकार दिया।" विवेचना कीजिए।
- उत्तर प्रदेश के सामाजिक इतिहास को सहेजने में लोक संगीत की भूमिका का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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