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9 अगस्त 1925 की शाम शाहजहाँपुर से लखनऊ जा रही एक ट्रेन को लखनऊ के बाहर के छोटे-से स्टेशन काकोरी के पास रोका गया। कुछ युवकों ने गार्ड का डिब्बा ज़बरदस्ती खोला और उसमें रखे सरकारी खज़ाने के थैले ले लिए। वे हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) के सदस्य थे, और यह धन स्वतंत्रता के लिए सशस्त्र संघर्ष में लगना था। काकोरी कांड — और उसके बाद चले मुकदमे और फाँसियों — ने इसके नेताओं को राष्ट्रीय नायक बना दिया।
आरंभिक क्रांतिकारी गतिविधियाँ
- गेंदालाल दीक्षित ने राम प्रसाद बिस्मिल और अन्य साथियों के साथ मिलकर मैनपुरी षड्यंत्र (1918) संगठित किया। इसका उद्देश्य क्रांति के लिए धन और हथियार जुटाना था; पुलिस ने इसका भंडाफोड़ कर दिया।
हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (1924)
- 1924 में शचींद्रनाथ सान्याल, राम प्रसाद बिस्मिल, जोगेश चंद्र चटर्जी और अन्य ने इसकी स्थापना की।
- लक्ष्य: सशस्त्र क्रांति के ज़रिए एक संघीय गणराज्य — "संयुक्त राज्य भारत" (United States of India) — की स्थापना।
- इसके घोषणापत्र द रिवोल्यूशनरी (The Revolutionary) में ये लक्ष्य रखे गए थे।
काकोरी ट्रेन एक्शन (1925)
| पहलू | विवरण |
|---|---|
| तारीख | 9 अगस्त 1925 |
| स्थान | काकोरी के पास, लखनऊ ज़िला |
| भाग लेने वाले | राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ुल्ला ख़ान, राजेंद्र लाहिड़ी, चंद्रशेखर आज़ाद, शचींद्र बख्शी, मन्मथनाथ गुप्त और अन्य |
| उद्देश्य | क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए सरकारी धन हासिल करना |
मुकदमा और फाँसियाँ
- बहुत से सदस्य गिरफ़्तार हुए और काकोरी षड्यंत्र केस में उन पर मुकदमा चला।
- दिसंबर 1927 में चार को फाँसी दी गई:
- राम प्रसाद बिस्मिल (गोरखपुर जेल);
- अशफ़ाक़ुल्ला ख़ान (फ़ैज़ाबाद जेल);
- राजेंद्र लाहिड़ी (गोंडा जेल);
- ठाकुर रोशन सिंह (इलाहाबाद/नैनी जेल)।
- अन्य को लंबी सज़ाएँ मिलीं।
- चंद्रशेखर आज़ाद गिरफ़्तारी से बच निकले।
बिस्मिल और अशफ़ाक़ुल्ला: एक दोस्ती
- राम प्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारी होने के साथ कवि भी थे। उन्होंने "सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है" गीत को लोकप्रिय बनाया (इसकी रचना का श्रेय शायर बिस्मिल अज़ीमाबादी को दिया जाता है)।
- शाहजहाँपुर के मुसलमान अशफ़ाक़ुल्ला ख़ान बिस्मिल के घनिष्ठ मित्र और साथी थे। उनकी दोस्ती स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू–मुस्लिम एकता के प्रतीक के रूप में याद की जाती है।
चंद्रशेखर आज़ाद और HSRA
- चंद्रशेखर आज़ाद, जिन्होंने घोषणा की थी कि वे कभी जीवित नहीं पकड़े जाएँगे, ने आंदोलन को फिर से संगठित किया।
- 1928 में दिल्ली के फ़िरोज़शाह कोटला में हुई एक बैठक में भगत सिंह, सुखदेव और अन्य के साथ HRA को हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) में बदल दिया गया — और इसके लक्ष्यों में समाजवाद जोड़ा गया।
- HSRA की कार्रवाइयों में लाहौर में सॉन्डर्स की हत्या (1928) और केंद्रीय विधानसभा (Central Legislative Assembly) में बम फेंकना (1929) शामिल थे।
आज़ाद की शहादत
- 27 फ़रवरी 1931 को इलाहाबाद के अल्फ़्रेड पार्क में पुलिस ने आज़ाद को घेर लिया। मुठभेड़ के बाद पकड़े जाने के बजाय उन्होंने अपनी आख़िरी गोली खुद को मार ली।
- यह पार्क अब चंद्रशेखर आज़ाद पार्क कहलाता है।
क्रांतिकारियों के विचार
| विचार | विवरण |
|---|---|
| पूर्ण स्वतंत्रता | कांग्रेस द्वारा पूर्ण स्वराज (1929) अपनाने से काफ़ी पहले |
| गणराज्य | भारतीय गणराज्य, न कि डोमिनियन का दर्जा (dominion status) |
| समाजवाद | शोषण समाप्त करने के प्रति HSRA की प्रतिबद्धता |
| धर्मनिरपेक्षता | बिस्मिल और अशफ़ाक़ुल्ला; धर्म और सांप्रदायिकता पर भगत सिंह के लेख |
| बलिदान | अपने प्राण देने की तत्परता |
विरासत
- उनके साहस ने युवा भारतीयों की एक पूरी पीढ़ी को प्रेरित किया।
- उनके विचार — गणराज्य, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता — उन मूल्यों का पूर्वाभास थे जो बाद में संविधान में स्थापित हुए।
- स्मारक और स्मृति-स्थल: काकोरी स्मारक, आज़ाद पार्क, शाहजहाँपुर और गोरखपुर के स्मारक।
अभ्यास
प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) जैसे प्रश्न:
- काकोरी कांड कब और कहाँ हुआ?
- काकोरी केस में फाँसी पाने वाले चार क्रांतिकारियों के नाम बताइए।
- HRA का नाम HSRA कब और कहाँ रखा गया?
- चंद्रशेखर आज़ाद की शहादत कहाँ हुई?
- मैनपुरी षड्यंत्र किसने संगठित किया?
मुख्य परीक्षा जैसे प्रश्न:
- "उत्तर प्रदेश के क्रांतिकारियों में साहस के साथ स्वतंत्र भारत की स्पष्ट दृष्टि भी थी।" विवेचना कीजिए।
- राष्ट्रीय आंदोलन में काकोरी के शहीदों के योगदान का परीक्षण कीजिए।
तारीख़ों और आँकड़ों पर एक बात। परीक्षा का पैटर्न, रिक्तियाँ और कार्यक्रम हर साल बदल सकते हैं। ताज़ा जानकारी हमेशा Uttar Pradesh Public Service Commission की वेबसाइट पर जारी नवीनतम अधिसूचना में देखें।
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